पीरियड से कुछ दिन पहले रील्स पर आँसू और छोटी-छोटी बातों पर ग़ुस्सा लगभग सबको जाना-पहचाना है: यह PMS है, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम। आमतौर पर पीरियड शुरू होते ही यह छूट जाता है। 100 में से 2–4 महिलाओं में यह इतना तेज़ होता है कि ज़िंदगी में रुकावट बने, और इसका इलाज होता है।

पीरियड से पहले इतना तूफ़ान क्यों उठता है?

साइकल के दूसरे हिस्से में हॉर्मोन पहले बढ़ते हैं, और पीरियड से पहले गिरते हैं। कुछ लोगों का दिमाग़ इन आम उतार-चढ़ावों पर ज़्यादा तीखी प्रतिक्रिया देता है, और डॉक्टर इसे सेरोटोनिन और मूड से जुड़े दूसरे पदार्थों से जोड़ते हैं। इसलिए इन दिनों भावनाएँ ज़्यादा ज़ोर से बोलती हैं, और सब्र कम होता है।

क्या “पीरियड फ़्लू” सच में होता है?

बदन दर्द, थकान और टूटा-टूटा लगना सच में PMS के लक्षणों की लिस्ट में हैं, तो “पीरियड फ़्लू” बहुतों का जाना-पहचाना है, भले यह घरेलू नाम हो। थर्मामीटर आम से थोड़ा ज़्यादा दिखा सकता है: साइकल के दूसरे हिस्से में शरीर 0.3–0.5 डिग्री गर्म होता है। लेकिन 38 या उससे ज़्यादा, या किसी भी नंबर पर कँपकँपी PMS नहीं है, ज़्यादातर ऐसे शरीर इन्फ़ेक्शन से लड़ रहा होता है।

इन दिनों क्या मदद करता है?

हर 2–3 घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाओ, एक्टिव रहो और नींद पूरी करो: डॉक्टर यहीं से शुरू करते हैं। इन दिनों कॉफ़ी और शराब कम कर देना बेहतर है। आइबुप्रोफ़ेन या पैरासिटामोल बदन दर्द और सिरदर्द में राहत देंगे।

योग, मेडिटेशन या धीमी साँसें तनाव कम करती हैं। कैलेंडर में वे दिन नोट करो जब तूफ़ान उठता है: दो-एक साइकल में लय दिखने लगती है, और ज़रूरी बातचीत सबसे भारी दिन पर नहीं पड़ेगी।

अगर यह काफ़ी नहीं, तो इलाज है। टॉक थेरेपी (CBT), कुछ गर्भनिरोधक गोलियाँ और एंटीडिप्रेसेंट मदद करते हैं। तेज़ PMS में एंटीडिप्रेसेंट कभी-कभी सिर्फ़ पीरियड से पहले के आख़िरी 2 हफ़्तों में लिए जाते हैं।

यह PMDD कब होता है?

PMDD, यानी प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फ़ोरिक डिसऑर्डर, PMS जैसा ही है, बस कहीं ज़्यादा तेज़। पीरियड से 1–2 हफ़्ते पहले नाउम्मीदी, तेज़ ग़ुस्सा, यह एहसास कि तुम संभाल नहीं पा रही, और कुछ में ख़ुदकुशी के ख़याल आते हैं। पीरियड शुरू होने के कुछ दिन बाद हल्का लगता है, और ऐसा हर साइकल होता है।

PMDD काम करने, लोगों से मिलने और रिश्ते संभालने में रुकावट बनता है। इसका इलाज एंटीडिप्रेसेंट, गर्भनिरोधक गोलियों और टॉक थेरेपी से होता है। डॉक्टर डायग्नोसिस तब करते हैं, जब लक्षण कम से कम 2 महीने हर महीने दोहराएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मम्मी कहती हैं कि उनके ज़माने में PMS नहीं होता था। कौन सही है?

तुम। PMS को डॉक्टर मानते हैं, और गायनेकोलॉजिस्ट के पास इसके इलाज की अलग गाइडलाइन हैं। तुम कुछ गढ़ नहीं रही।

PMS कितने दिनों तक रहता है?

लक्षण पीरियड से पहले के आख़िरी 1–2 हफ़्तों में आते हैं और आमतौर पर ब्लीडिंग के पहले दिनों में छूट जाते हैं। अगर पूरे महीने भारी लगता है और पीरियड से पहले बस और बिगड़ता है, तो यह डिप्रेशन या एंग्ज़ाइटी जैसा ज़्यादा है। PMS का इलाज कराने आई लगभग आधी महिलाओं में ये मिलते हैं, और इनका भी इलाज होता है।

पार्टनर से PMS के बारे में कैसे बात करूँ कि बहाना न लगे?

किसी शांत दिन बात करो, जब कोई तनाव में न हो। कैलेंडर में दिखाओ कि आमतौर पर तूफ़ान कब उठता है, और तय कर लो कि इन दिनों तुम्हें क्या मदद करता है: शांति, खाना, कामों में हाथ बँटाना।

और अगर मुझे PMS बिल्कुल नहीं होता?

ऐसा भी होता है: बहुतों में पीरियड से पहले के बदलाव हल्के या लगभग न दिखने वाले होते हैं। डॉक्टर PMS पर गंभीरता से तब ध्यान देते हैं, जब वह महीने-दर-महीने ज़िंदगी में रुकावट बने।

संक्षेप में

  • हर 2–3 घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाओ
  • कैलेंडर में वे दिन नोट करो जब तूफ़ान उठता है
  • अगर PMS ज़िंदगी में रुकावट बने, तो डॉक्टर के पास जाओ: इसका इलाज होता है

स्रोत: NHS: PMS (premenstrual syndrome)

शैक्षिक सामग्री; यह पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।

हम साइकल पर लेख कैसे लिखते हैं